क्या आप बार बार जिंदगी में असफल हो रहे हैं? क्या आपका मन एक ही कार्य को बार बार करने से उब गया है या अब आपको जीवन में हर तरफ़ निराशा ही दिख रही है? और आप इन सबसे परेशान होकर कोई खतरनाक आत्मघाती कदम उठाने की सोच रहे हैं, तो भाई एक पल को ठहरिए इस ख्याल को थोड़ा दूर कर दीजिए और अपने कीमती वक़्त में से चंद मिनट निकाल कर इसे पढ़िए, जिसे पढ़ने के बाद आपको अपने फैसले पर अफसोस होगा और आप दुबारा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जुट जाएंगे। बात शुरू करते हैं अपने पहले सवाल से, 'असफलता' कई लोग इसे एक ऐसे शब्द के रूप में देखते हैं जैसे कि किसी ने बम फोड़ दिया हो या ये कोई बेहद अपशकुन कारी शब्द हो पर मैं ये कहना चाहुँगा कि असफलता भी उतना ही महत्व रखती है जितना सफलता। ठीक उसी तरह जिस तरह पुण्य का अस्तित्व पाप की वजह से होता है। सुबह का सांझ से, हां बार बार मिलने वाली असफलता परेशान तो करती है पर वो हर बार हमें एक नई सीख दे कर जाती है। "थॉमस अल्वा एडीसन" ये नाम तो शायद हर किसी ने सुना होगा। हां ये वही शख्सियत हैं जिन्होंने बल्ब का आविष्कार किया था। उसी बल्ब का आविष्कार ...
# आत्मनिर्भरता बहुत शोर हो रहा है, बहुत सवाल पिके जा रहे हैं, तर्क कुतर्क सब कुछ। मैं यह नहीं कहता कि सवाल न उठाइये, अजी उठाइये पर सोच समझकर की आपके सवाल में क्या है? क्या हमने कभी सोचा है कि आत्मनिर्भरता क्या है? क्यों है? या सुनते ही टूट पड़ते हैं, फेसबुकिया पोस्टो से उबाल आ गया, मोदी जी हमें विदेशी वस्तुये लेने से मना कर रहे हैं, स्वयं गंध-ग्रहण लग्जरी विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। सच मे तरस आता है बस, बहुत कुछ नहीं, बहुत ही बुरे दौर से गुजरा अब तक उस जीवन में पर कभी भूके सोने की नौबत न आई, इसकी वजह मेरी माँ रही, जिसने मुझे बचपन से ही आत्मनिर्भरता का ये पाठ पढ़ाया, चाहे वो कयारियों में घर की रसोई के लिए सब्जी बोना हो। , उसको सींचना हो, भूसे की कमी पर भूसा न खरीद कर हरे चारे की व्यवस्था करना हो, बिना श्रमिक लगाए गेहूं की कटाई निराई, सिचाई बुवाई आदि करना हो, खुद आलू की बुवाई से लेकर खुदाई तक का काम अपने बल पर करके अर्थ की बचत करना हो ताकि वही अर्थ या पैसा अन्य जरूरी कामो , स्कूल फीस , किताबे, दवाई आदि मे...