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उनाकोटि की सैर,अगरतला(त्रिपुरा))

 उनाकोटि की सैर, अगरतला ( त्रिपुरा)



तो कैसे है आप सब?  सब खरीयत ही होगी। तो चलिए आज कुछ एडवेंचर करते है।


"उनाकोटि" सुनते ही कुछ अजीब लगा ना?

तो चलो जान लेते है क्या है उनाकोटी का मतलब?

क्या है उनाकोटि के राज?

क्या सच में यहां है भगवान शिव का वास?


कई सवालों के जवाब की सैर करने चलते है उनाकोटि।


कईयों को पता होगा या कई लोगो को नहीं की ये आखिर है क्या और आखिर है कहाँ?


यह  भारत के खूबसूरत राज्य त्रिपुरा में बसा है।

उनाकोटी के बारे में एक शब्द में जानना हो तो बस इसके नाम का ही मतलब समझ लीजिए। उनाकोटि बंगाली शब्द है जिसका अर्थ होता है, करोड़ में 1 कम यानि की 99 लाख 99 हजार 999।


कैसे पहुंचे उनाकोटि?




★सबसे बेस्ट तरीका है खुद के वाहन, टैक्सी या फिर हेलीकॉप्टर।


★फ्लाइट से जाना है तो मुंबई, नई दिल्ली, बैंगलोर, गुवाहाटी, इम्फाल जैसे आदि शहरों से जुड़ा कमालपुर उनाकोटि का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। वहां से आपको बस या टैक्सी मिल जाएगी।


★आप हेलीकॉप्टर सैर चाहते हैं तो कैलाशहर या अगरतला पहुंचे। 


★ट्रेन से जाना है तो निकटतम रेलवे स्टेशन कुमारघाट है जो त्रिपुरा के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। वहां से उनाकोटी जाने के लिए आपको बस और टैक्सी सेवाएं हमेशा उपलब्ध मिलेंगी।


★सड़क मार्ग से मजे में जाना है तो नजदीक के अधिकांश शहर या कस्बों से बस सेवाएं उपलब्ध हैं।


उनाकोटि की कुछ मान्यताएं।


★अब बात करे उनाकोटी की लोकल मान्यताओं की तो वहां के लोग उनाकोटि के बारे में आपको कई तरह की मान्यताएं बताएंगे। 


उसमे पहली तो ये है कि भगवान शिव  एक करोड़ देवताओं के साथ काशी जा रहे थे। वे  विश्राम करने के लिए त्रिपुरा की एक छोटी पहाड़ी पर रुक गए। अगली सुबह लंबी दूरी के कारण सबको जल्द उठने को कहा लेकिन शिवजी के अलावा कोई नहीं उठा तो उन्होंने सभी को पत्थर बनने का श्राप दे दिया। वहां सिर्फ शिव जी ही उठे थे तो उन्हें छोड़ बाकी 99,99,999 देवता पत्थर बन गए। एक कोटी में एक कम इसलिए उस जगह का नाम  उनाकोटी पड़ गया।


★ एक मान्यता ऐसी भी है कि कालू कमर नामक प्रसिद्ध मूर्तिकार उस जगह पर सिर्फ खुद के रचे एक रात में एक लाख मूर्तियां बनाना चाहता था जो कि एक करोड़ देवताओं की छवि का हिस्सा था। जिससे कि उस जगह को काशी का दर्जा मिले। लेकिन कलाकार का आत्मदंभ सभी रचनाकारों को पसंद नहीं आया इसलिए उन्होंने एक मूर्ति छोड़ दी। शायद इसी लिए ये जगह काशी धाम का रूप हासिल नहीं कर पाई।


★कुछ जगह यह भी मान्यता सुनने को मिलती है कि कालू कमर भगवान शिव और मैया पार्वती का परम भक्त था जो उनके साथ कैलाश पर्वत जाना चाहता था लेकिन भगवान शिव ने शर्त रखी कि उसे एक रात में एक कोटि शिवस्वरूप रचनाएं करनी होंगी। दुर्भाग्यवश वह सूर्योदय से पहले एक कोटी में एक मूर्ति कम रच पाया और वो स्थान उनाकोटि कहलाया।



आकर्षण का केंद्र


★उनाकोटि की मूर्तियां करीब करीब आठ से नौ या उससे भी पहले की शताब्दी की मानी जाती हैं।


★रघुनंदन पहाड़ी के किनारों को और पत्थरों को तराशकर यहां कई मूर्तिया उकेरी गई हैं।


★उनाकोटिश्वर शिव की दस फिट मुकुट सहित तीस फिट ऊंची मूर्ति देखने को मिलेगी। मुकुट के एक तरफ देवी दुर्गा की मूर्ति है तो एक तरफ गंगा मैया की। शिव जी की मूर्ति को ‘उनाकोटिश्वर काल भैरव’ भी कहा जाता है।


★इस एक स्थान पर उनाकोटिश्वर के अलावा कालभैरव, चंद्रशेखर शिव, कामदेव, त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश्), नरसिम्हा, राधा-कृष्ण, हनुमान, सरस्वती, उमा-महेश्वर, शनि, नंदी, इत्यादि सभी हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियां देखने को मिल जाएंगी।


★यहां के पत्थरों पर उकेरी गई बड़ी प्रतिमाएं वास्तव में आश्चर्यजनक हैं। साथ में उनके सभोवताल की हरियाली आपका मन मोह लेगी।


उनाकोटि भौगोलिक और ऐतहासिक


 समुद्र तल से उनाकोटी 915 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।


पहाड़ पर दो तरह की मूर्तियाँ मिलती हैं। एक जो उकेरी गईं हैं और दूसरी जो पत्थरों से बनाई गई हैं। किसने इनको बनाया है? और इनका इतिहास किससे जुड़ा है? इस बारे में आज तक किसी को कुछ भी पता नहीं है।



अगरतला से लगभग 178 किमी दूर और कैलाशहर से 8 किमी दूर स्थित उनाकोटि एक सदियों पुराना शैव तीर्थ स्थान है, जो कि देश की किसी भी अन्य तीर्थस्थली की तुलना में अपनी भव्यता और कलात्मकता के कारण विलक्षण है।


हर साल एक बड़ा मेला जिसे अशोकाष्टमी मेला के नाम से जाना जाता है, अप्रैल के महीने में आयोजित किया जाता है। त्योहार पर हजारों तीर्थयात्रियों द्वारा दौरा किया जाता है। एक और छोटा त्योहार जनवरी में होता है।


इस स्थान को सदियों से उपेक्षा का सामना करना पड़ा लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपनाये जाने के बाद भारत सरकार ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित करने के लिए संपर्क किया है।


यहां हर साल अप्रैल महीने में एक अशोकाष्टमी नाम से मेला लगता है जिसमें हजारों तीर्थयात्री दौरा करते हैं। एक छोटा मेला जनवरी में भी लगता है।



धन्यवाद 🙏


लेखक - शुभ दुधबले

चित्र- Google.

टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
बहुत ही सुंदर जगह

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