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अक्टूबर 2, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सफलता और असफलता के मायनें ।

  क्या आप बार बार जिंदगी में असफल हो रहे हैं? क्या आपका मन एक ही कार्य को बार बार करने से उब गया है या अब आपको जीवन में हर तरफ़ निराशा ही दिख रही है? और आप इन सबसे परेशान होकर कोई खतरनाक आत्मघाती कदम उठाने की सोच रहे हैं, तो भाई एक पल को ठहरिए इस  ख्याल को थोड़ा दूर कर दीजिए और अपने कीमती वक़्त में से चंद मिनट निकाल कर इसे पढ़िए, जिसे पढ़ने के बाद आपको अपने फैसले पर अफसोस होगा और आप दुबारा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जुट जाएंगे।  बात शुरू करते हैं अपने पहले सवाल से, 'असफलता' कई लोग इसे एक ऐसे शब्द के रूप में देखते हैं जैसे कि किसी ने बम फोड़ दिया हो या ये कोई बेहद अपशकुन कारी शब्द हो पर मैं ये कहना चाहुँगा कि असफलता भी उतना ही महत्व रखती है जितना सफलता। ठीक उसी तरह जिस तरह पुण्य का अस्तित्व पाप की वजह से होता है। सुबह का सांझ से,  हां बार बार मिलने वाली असफलता परेशान तो  करती है पर वो हर बार हमें एक नई सीख दे कर जाती है। "थॉमस अल्वा एडीसन" ये नाम तो शायद हर किसी ने सुना होगा। हां ये वही शख्सियत हैं जिन्होंने बल्ब का आविष्कार किया था। उसी बल्ब का आविष्कार ...

आत्मनिर्भरता।

 # आत्मनिर्भरता बहुत शोर हो रहा है, बहुत सवाल पिके जा रहे हैं, तर्क कुतर्क सब कुछ। मैं यह नहीं कहता कि सवाल न उठाइये, अजी उठाइये पर सोच समझकर की आपके सवाल में क्या है?  क्या हमने कभी सोचा है कि आत्मनिर्भरता क्या है? क्यों है?  या सुनते ही टूट पड़ते हैं, फेसबुकिया पोस्टो से उबाल आ गया, मोदी जी हमें विदेशी वस्तुये लेने से मना कर रहे हैं, स्वयं गंध-ग्रहण लग्जरी विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।  सच मे तरस आता है बस, बहुत कुछ नहीं, बहुत ही बुरे दौर से गुजरा अब तक उस जीवन में पर कभी भूके सोने की नौबत न आई, इसकी वजह मेरी माँ रही, जिसने मुझे बचपन से ही आत्मनिर्भरता का ये पाठ पढ़ाया, चाहे वो कयारियों में घर की रसोई के लिए सब्जी बोना हो। , उसको सींचना हो, भूसे की कमी पर भूसा न खरीद कर हरे चारे की व्यवस्था करना हो,    बिना श्रमिक लगाए गेहूं की कटाई निराई, सिचाई बुवाई आदि करना हो,    खुद आलू की बुवाई से लेकर खुदाई तक  का काम अपने बल पर करके  अर्थ की बचत  करना हो  ताकि वही अर्थ या पैसा अन्य जरूरी कामो , स्कूल फीस , किताबे, दवाई आदि मे...

आधुनिक जीवन शैली और स्वास्थ्य

 आधुनिक जीवन शैली कभी कभी हम सोचते हैं कि जैसा जीवन हम सब जिये जा रहे हैं या यूं कहें कि सिर्फ काटे जा रहे हैं। जीवन काटने का अर्थ यह है कि हम एक बंधित जीवन जी रहे है जिसके भविष्य में सिर्फ बर्बादी है। हमारा मानव जीवन प्रकृति का दिया हुआ एक सुन्दर उपहार है इस लिए इसे सत्य और मानवता के प्रति समर्पित हो कर जीने की कोशिश करनी चाहिेए पर आज हमारी आधुनिक जीवन-शैली कैसी हो गयी है, इसकी कुछ  जानकारी निम्नलिखित बातों से मिलती है - भले ही आज हमारे पास रहने के लिए ऊंची रिहायशी इमारत है, लेकिन हमारी सोच उतनी ही छोटी हो गई है। छोटी छोटी बातों पर गुस्से में आकर हम अपने अपनों से दूर रहने लगे हैं। हमने आने जाने के पक्के रास्ते तो बना लिए लेकिन उसके साथ ही हम संकुचित विचारों से बुरी तरह घिरे हुए हैं। हम खरीदते अधिक हैं किन्तु आनंद कम उठा पाते हैं। हमारे घर तो बहुत बड़े बड़े हैं किन्तु परिवार उतने ही छोटे। हमारे पास सुविधाएं तो बहुत हैं किन्तु उनके उपयोग का समय बहुत कम है। हमारे पास ज्ञान तो है लेकिन फैसला लेने की क्षमता नहीं। हम निपुण होते हुए भी समस्याओं में उलझे रहते हैं। पर्याप्त दवाईयां हो...

उनाकोटि की सैर,अगरतला(त्रिपुरा))

  उनाकोटि की सैर, अगरतला ( त्रिपुरा) तो कैसे है आप सब?  सब खरीयत ही होगी। तो चलिए आज कुछ एडवेंचर करते है। "उनाकोटि" सुनते ही कुछ अजीब लगा ना? तो चलो जान लेते है क्या है उनाकोटी का मतलब? क्या है उनाकोटि के राज? क्या सच में यहां है भगवान शिव का वास? कई सवालों के जवाब की सैर करने चलते है उनाकोटि। कईयों को पता होगा या कई लोगो को नहीं की ये आखिर है क्या और आखिर है कहाँ? यह  भारत के खूबसूरत राज्य त्रिपुरा में बसा है। उनाकोटी के बारे में एक शब्द में जानना हो तो बस इसके नाम का ही मतलब समझ लीजिए। उनाकोटि बंगाली शब्द है जिसका अर्थ होता है, करोड़ में 1 कम यानि की 99 लाख 99 हजार 999। कैसे पहुंचे उनाकोटि? ★सबसे बेस्ट तरीका है खुद के वाहन, टैक्सी या फिर हेलीकॉप्टर। ★फ्लाइट से जाना है तो मुंबई, नई दिल्ली, बैंगलोर, गुवाहाटी, इम्फाल जैसे आदि शहरों से जुड़ा कमालपुर उनाकोटि का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। वहां से आपको बस या टैक्सी मिल जाएगी। ★आप हेलीकॉप्टर सैर चाहते हैं तो कैलाशहर या अगरतला पहुंचे।  ★ट्रेन से जाना है तो निकटतम रेलवे स्टेशन कुमारघाट है जो त्रिपुरा के सभी प्रमुख शहरों से ज...

नींबू को दुकान के बाहर लटकाना केवल एक अंधविश्वास है या फिर इसके पीछें है कोई विज्ञान।

 आपनें देखा होगा,सभी प्रतिष्ठित कार्यालयों, प्रतिष्ठानों के बाहर आपनें भी कुछ नोटिस किया होगा। जो लगभग सभी जगह एक समान है। दुकान, कर्यालय के बाहर काले धागे पर  लटका नींबू और मिर्च। क्या आपनें अब तक ऐसा कुछ नहीं देखा तो कभी गौर कीजिए, किसी व्यावसायिक कार्यलय के बाहर।  क्या आप इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तर्क जानना चाहते हैं।  मैं आपकों ये और ऐसे कई सारे तथ्यों से रुबरु करवा सकता हूँ। इसी क्रम में मेरे पहले तथ्य को तो आप समझ ही गये होंगे।  पहले वो देख लेते हैं जो एक आम आदमी की नजर में है। यह तर्क है आध्यात्म का। यह दुकान, कार्यालय के बाहर नजर लगने से बचाने का एक सरल टोटका है। सनातन सभ्यता और संस्कृति कई हजार वर्षों पुरानी है और हमारे सभी प्राचीन तथ्य और मान्यताएं आज के विज्ञान से भी उन्नत हैं। यह मैं नही बल्कि विज्ञान कहता है।  विज्ञान इस बात को प्रमाणित कर चुका है कि नींबू के रस की प्रकृति अम्लीय(ACIDIC) होती है। इसे विटमिन C  तथा साईट्रिक अम्ल का प्रमुख स्त्रोत भी माना जाता है। अम्ल के भीतर (+) धनात्मक चार्ज के इलैक्ट्रान मौजूद होते हैं  जो (-)त्...