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नींबू को दुकान के बाहर लटकाना केवल एक अंधविश्वास है या फिर इसके पीछें है कोई विज्ञान।

 आपनें देखा होगा,सभी प्रतिष्ठित कार्यालयों, प्रतिष्ठानों के बाहर आपनें भी कुछ नोटिस किया होगा। जो लगभग सभी जगह एक समान है।

दुकान, कर्यालय के बाहर काले धागे पर  लटका नींबू और मिर्च।

क्या आपनें अब तक ऐसा कुछ नहीं देखा तो कभी गौर कीजिए, किसी व्यावसायिक कार्यलय के बाहर।

 क्या आप इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तर्क जानना चाहते हैं।


 मैं आपकों ये और ऐसे कई सारे तथ्यों से रुबरु करवा सकता हूँ।

इसी क्रम में मेरे पहले तथ्य को तो आप समझ ही गये होंगे।


 पहले वो देख लेते हैं जो एक आम आदमी की नजर में है। यह तर्क है आध्यात्म का।

यह दुकान, कार्यालय के बाहर नजर लगने से बचाने का एक सरल टोटका है। सनातन सभ्यता और संस्कृति कई हजार वर्षों पुरानी है और हमारे सभी प्राचीन तथ्य और मान्यताएं आज के विज्ञान से भी उन्नत हैं। यह मैं नही बल्कि विज्ञान कहता है। 


विज्ञान इस बात को प्रमाणित कर चुका है कि नींबू के रस की प्रकृति अम्लीय(ACIDIC) होती है। इसे विटमिन C  तथा साईट्रिक अम्ल का प्रमुख स्त्रोत भी माना जाता है।


अम्ल के भीतर (+) धनात्मक चार्ज के इलैक्ट्रान मौजूद होते हैं  जो (-)त्रणात्मक  चार्ज को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।  विज्ञान का  आकर्षण -प्रतिकर्षण का  नियम तो आपको पता ही होगा और जो बुरी नजर होती है वह नकारात्मक(-) ऊर्जा होती है तथा नींबू में मौजुद (+) चार्ज उसे अपनी तरफ खींच लेता है।

कालें रंग का धागा अर्थात काला रंग विज्ञान की नजर में ऊर्जा का सबसे प्रबल अवशोषक है।

इसी कारण जब नींबू सूख जाता है तो उसका कोई महत्व नही रहता इसलिए उसकी जगह नया नींबू लगया जाता है।

धन्यवाद।


टिप्पणियाँ

dhaval trivedi ने कहा…
बहुत अच्छेसे बताया आपने।
dhaval trivedi ने कहा…
बहुत अच्छेसे बताया आपने।
सूरज शुक्ल ने कहा…
वाह वाह वाह भाई सचमुच हमारा ज्ञान विज्ञान परम्पराए कितनी तर्कपूर्ण हैं।👏👏👏

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